साखी-125 राग मारू
जागो जागो जंबूद्वीप हुई छै आवाज,
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जागो जागो जंबूद्वीप हुई छै आवाज,
सही सोदागर जंभराज आइयो
आय नै संभरथल लियो छै मेहलाण,
विणज करो मेरा भाइयो
विणज तो विचार कीजै, कपट वाण न कीजिये
काच कथीर भगार परहरि, मन दे हीरा लीजिये
रत्न लाल भंडार मुक्ता, जोय मांगै सो दिये
ऐसो समरथ शाह आये, चेत कर जीव जागिये (१)
विणजो विणजो मोमण, चतुर सुजान हरि पिछाणहीं
मुरखा मनहट विणज न होय, परख नहीं जाणहीं
जाणि परष पंथ पायो, परच पाखंड छाड़िये
संसार ममता छोडि प्राणी, अमर आश मांडिये
शाह सतगुरु नांव नींवी, प्रीत साटै हम लियो
छाडि छंदा भ्रांति परहर, साध मोमण विणजियो (२)
कृष्ण चरित हरि माघ, देवजी रा कुण लहै
आज म्हारो साहिब राजा मने उदास, सोहवति सा वहै
सा वही सोवति सुपह क्रिया, चार चौचक संभली
कांप्या कायर हीण करणी, मोमणां रे मन रली
साम सरसों साथ कीजै, मीन जल बिन क्यों रहे
बैकुंठ महलमेल्हाण देवजीरा,चरित हरिका कुण लहै (३)
धन्य धन्य सों दिन महूरत वार, बांरां इकबीसां मिलै
लंघिया छै भवजल दूतर पार, भवसर भी पिलै
पाल भवसरि पार जाइये, सरब सांसो भांजही
उत मिले मोमण दिलों चोखा, अधिक प्रीति उपाजही
श्याम को दीदार दीसे, पाइये बंछा मने
सुरां सुरपति हुवै मेलो, दिहाड़ो सोई धने (४)