साखी-36
निस दिन श्वास घटे मेरा जीयो, छःसौ इक्कीस हजारा
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सवैया
सरवर हंस मनायलै, नैड़ा थका बहोड़
म्हां बैठा थे ऊजला, म्हां सूं तान न तोड़
हंसा सरवर न छोड़िये, जै जल खारो होय
डाबर डाबर डोलता, भलो न कहसी कोय
लख आवे लख जावसी, कमेड़ो और काग
हंसा फेर न आवसी, सुण सायर निरभाग
रहता ने बरजूं नहीं, जाता ना लाऊं बहोड़
हंसां ने सरवर घणा, सायर हंसां करोड़
निस दिन श्वास घटे मेरा जीयो, छःसौ इक्कीस हजारा
पल पल आव घटे मेरा जीयो, हरदम सीजै थारा
दम सीज जावसी जम लेण आवसी, पकड़ ले जावसी
धन माल माया रहावसी, पीछे घणो पछतावसी
तैं नाम न लीयो सुक्रत न कीयो, छोड चल्यो घर बार ही
निश दिन श्वास घटे रे जीव, छःसौ इक्कीस हजारही (१)
अब तुम वृद्ध भयो मेरा जीयो, पींजर पड़यो रे पुराणो
इंद्रियां को तेज घटयो मेरा जीयो, उठ गयो देव दिवाणो
उठयो दिवाणो भयो बहरो, मुख नैनां पाणी झरै
शीश धूजै नांव सूझै, अधर अधर पगला धरै
पड़यो परवस करै गिरणा, गुण गोविंद नहीं गावियो
पींजर तेरो पड़यो पुराणो, बुढापो बेगो आवियो(२)
दुबधया दूर तजो मेरा जीयो, एक मन विष्णु धयावो
हरि को भजन करो मेरा जीयो, ज्यूं साहिब के मन भावो
भजन करणा अजर जरणा, क्षमा दया हृदय धरो
लोभ अंहकार क्रोध तजिये, आप जीवत ही मरो
कीजये नित साधु संगति, महा अमी रस पीजिये
एक मन एक चित्त करो भगति, दूर दुबधया कीजिये (३)
स्वर्गा का वास देवो मेरा जीयो, भवसागर दुःख हारो
कोटि असंख्य फिरयो मेरा जीयो, षट रूत में दुःख सारो
नाम प्यारो जीव निस्तारो, सकल अंग दुःख सीजिये
वाद विवाद निंदा न करणी, मन अपणो बस कीजिये
पाप संगत सब परहरो, सुसंगत नित कीजिये
कहे 'सुरजन' करो करणी, मुक्ति मार्ग दीजिये (४)