साखी-59
पतवो लिखदे जी हो ब्राह्मणां, कह ऊधो समझाय
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पतवो लिखदे जी हो ब्राह्मणां, कह ऊधो समझाय
तुम बिन दूभर जीयो द्योसड़ो( देशड़ो), हरि बिन रह्यो न जाय ।
कह जन ऊधो गोविन्द कब मिलै, वृन्दावन रो राव
रंग रो वीनइयो नंदलाल जांणोजी, श्रीरंग मिलाव ।
ऊधो माधोजी सूं यों कह, ऐसी कछू हमें न सुहाय
वीठला बहु दिन जीहो लाविया, रह्यो द्वाराका छाय ।
मोहनी मूरति जीहो माधवा, चतुर्भुज बसियो म्हारे चीत
देखो भाई नागर नंद रो कान्हवो, सगुण श्यामजी सूं प्रीत ।
सो संभर सो मथुरा द्वाराका, सब रंग जंभ अचंभ
कामणगारो है कान्हवो, पियो म्हारो पारब्रह्म ।
देखो भाई नागर नंद रो कान्हवो, चंचल चतुर सुजान
मेरोमन लागो हरिजी श्याम सूं,जाको हर मुरली सूं धयान ।
हरजी रा मीठा मीठा बोलणा, ओ म्हारे जीवड़े रो मूल
तन मन भक्तां सेती रम रह्यो, भेद न जाणै मूरखो थूल ।
गोकुल केरो जीहो ग्वालियो, ओ छै म्हारै जीवड़ रो आधार
सोला सहस्त्र गोपियां में, रह्यो छै बालमियों ब्रह्मचार ।
मेलो कीजै मन रा माधावा, तेरा जन कोड कराय
वां मिलियां हम जीवैं, बिन मिलियां मर जांय ।
बाल स्नेही म्हारो सायबो, अति ही पियारो पीव
हरि मुख देखण के कारणै, तलफत म्हारो जीव ।
देखो भाई नागर नंद रो कान्हवो, पियो मेरो परम दयाल
'आलम' प्रभुजी रो लाडलो, गिरधारलाल गवाल ।