साखी-58
मेलो कर मोटा धणी, गिण तेतीसां ज्ञान
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मेलो कर मोटा धणी, गिण तेतीसां ज्ञान
दर्शन दीजो देवजी, विष्णु विछोहा भान ।
पन्दरासौ अरु तिराणवें, बदि मंगशिर वमेख
तिथि नौमी निरखी निर्मली, ओल्हे हुवा अलेख ।
लालासर की साथरी, पौंहचि कियो प्रवाण
इलमां अंधियारो हुवो, जाणे भोम वरत्यो भाण ।
जल बिन मरे ज्यूं माछला, सारस मरै सनेह
हरि पाखो हरि जन मरै, दूनी तियागे देह ।
झूरे पपइयो बूंद बिन, बालक पखोजे माय
तो बिन जग जीवां धणी, भक्तां ऐसी विहाय ।
कृष्ण चरित्र कलियुग हुवो, सुणियो चौचक सार
पूरब पच्छिम कालपी, गिणियों गंगा पार ।
सिरजणहारो साध को, सदा संवारे काम
तके जन आया तालवै, मेलो थरप्यो मुकाम ।
पहिले मुंहि तांतू खड़ी, उरे उतारी आथ
एक संहस अरू चारसौ, खड़या सवेरि साथ ।
गोविंद भक्त गुणावती, अन्तर हुवो उडाण
एक सहंस अरु आठसौ, सीधा सन्त सुजाण ।
अपरंपर बिण आदमी, उरे सही री आंच
छव सौ भींयासर खड़या, सू जोवे सौ पांच ।
साधु स्वर्गे नावड़्या, सही बिस्वा बीस
टोहे संग स्वर्गे गया, सौ ऊपर चालीस ।
जग जीवत मृतक हुवा, निंव चाल्या होय खाक
धारु संग स्वर्गे गया, सांभलिया सौ लाख ।
झीमां जप जीवांधणी, अन्तर पूगी आस
जीव अताले उधरी, प्रगट लाख पचास ।
स्वर्ग गया सांसो मिटयो, खालक मेटी खोड़
अतली संग स्वर्गे गया, करता केई किरोड़ ।
चाखू चोकस सांभल्या, दूदे समप्र्यो शीश
राणो संग स्वर्गे गया, सो जाणे जगदीश ।
हाथू अरु नाथू निरखि, कसवां किसन सहाय
चलाण कियो चलित, पहुंता स्वर्ग पुलाय ।
हरि बिन हरिजन ना रहे, उर इधकी अणराय
विष्णु भक्त किरतो भलो, खड़यो घणां खड़ाय ।
करमांणी जाणीं कहै, करां न कुल की काण
बाड़ाणी भीषर खड़या, चढ़िया स्वर्ग विवांण ।
गोदारे गुरु ओलख्यो, समधा सन्त सुजाण
सोनी किसन भादू सही, सायर अर सुरताण ।
जग्गो जमाते प्रगटयो, झोरड़ साध बखाण
लक्ष्मण अरु पांडु परखि, खड़या खरींगे जाण।
गंग पारी गंगा खड़या, सिंवरो सिरजणहार
कुलचंद संग स्वर्गे गया, दाख्या दोढ़ हजार ।
कहिये कनबज कालपी, करता सारे काज
साधु खड़या सब सातसौ, महामुखी महाराज ।
बाल वृद्ध तरणी तरुण, काया तजे केतान
कुण जाणे कितना खड़या, गोविंद करसी ज्ञान ।
करि काठी वूही कंवल, तका हुई तरवार
घर का घर ही में खड़या, वण का वणी मंझार ।
तहां बींछड़ वांसै रहा, अन्तर अधिक उदास
परमेश्वर पूरी करो, अन्तर्यामी आस ।
है-है-कारो बरतियो, इलाफिरी जुग आण
कांप्या सुर नर देवता, हिन्दु मुसलमाण ।
श्वेत पुवंग पूरो पुरुष, दीठो समझ सवेर
दिन तीजो केशो कहै, रह्या फिरी जुग रेर ।