साखी-92
फिटि रे फिटि नर फिटि फीटो फिरै
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दोहा
दूदा देसोटो दियो, मन में घणो सधीर
कुवै ऊपर निरखियो, जगतारण जंभ वीर
थलीये ओट दूदो मिल्यो, तुठा सारा काज
जब लग खांडो राखसी, तब लग निश्चल राज
दूदा दुरजन पालटै, जे चढ आवै भूप
आज्ञा छै जंभदेव री, अगिन दीजै धूप
कामणि मिली हिंडोले चली, गावै आल जंजाल
जंभ अचंभो (न) गावहीं, जो बचै जम काल
फिटि रे फिटि नर फिटि फीटो फिरै
थूल सूं जायकरि प्रीत जोड़ै
पति कूं छाडिकर प्रीत औरां करै,
जाणतो जढ नर सीस फोड़ै
आपणो बाप तजि बाप औरां कहै
वर्णसंकर हू फिरै सारे
दास ‘हरजी’ कहै सरम कैसैं रहै
धूड़ि मुंहि धूड़ि मुंहि धूड़ि थारै (१)
आव रे आव नर ओट हरि आपकी,
आन की ओट सूं चोट खावै
भूत अर प्रेत तजि भजि साचो धाणी,
जंभ गुरु याद कर मुकति पावै
साच अर शील संतोष हिरदै धारो,
कूड़ अर कपट सूं काम कांई
दास ‘हरजी’ कहै लाज तबही रहै,
याद करि याद करि याद सांई (२)
जागि रे जागि नर जागि बिरियां थई,
नींद सूं नेह क्यूं करै भाई
रात अर दिन में आणि जम घेरिसी,
मात अर तात सूं सरै न काई
जीव जोखे पड़ै सास हिचकी अड़ै
सैन ही सैन समझाय हार्यो
दास ‘हरजी’ कहै जीव वांसै रहै,
धींग सूं धाकौ कुत कांय मार्यो (३)
चेत रे चेत नर चेत तोसूं कही
वार वार ही समझाय थाका
तैं नहीं एक धारी चित भीतर,
कहत सुनत मांही पींजर पाका
जत अर सत की पाज मेटै मती,
सिद्ध अर साधा सब साख गावै
दास ‘हरजी’ कहै दिढ़ कैसैं रहै,
जांणतो जढ़ नर जहर खावै (४)
जाहि रे जाहि पर जाहि जग जोंवता
राव अर रंक उठि राह लागा
ऊंच अर नीच को आंतरो नांहि,
एक ही पंथ सब जांहि भागा
जम की झपट सूं कपट रहता नाहिं,
लपट है जीव डर वाट लागा
दास ‘हरजी’ कहै आज दीयो लहै,
लछि वांसै रही जाहि नागा (५)
हजूरी नामावली