प्रचलित अप्रचलित अन्य साखी
साखी-139
मेरे कानां आवाज हुई, अवतार लियो संसारो।
इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।
मेरे कानां आवाज हुई, अवतार लियो संसारो।
संभराथल गुडी उछली, आयो कृष्ण मुरारो।
करणी क्रिया फरमाई, जांतै लधियो पारो।
क्षमा दया अरु भगति करो, केवल नांव उचारो।
पराई निंदा मत करो, मत बांधो सिर भारो।
चोरी जारी न करो, परहरियो अहंकारो।
चोह जुग का बीछड़या मिलो, विष्णु को अवतारो।
रायचंद बोलै वीनती, साधां संग पार उतारो।