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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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साखी-89

राजा रे मन रीझ, मन मां मतो उपायो

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दोहा

जाति कुल की तात निश्चय, पंथ पर काजै मिल्यो

गुणगुंथी' गोकुल 'कह साखी,खेजड़ली खल कट सांभल्यो

राजा रे मन रीझ, मन मां मतो उपायो

हाकिम, सू ं कर हेत विधा सूं वेग बुलायो

बुलाय विधा सूं बात पूछी, जस कीजे जसिवों

पाप पुण्य री बांधिये, नरपति कहै कीजै निवों

निवों तो करस्या नींव थरप्यो, ज्ञान खोज्यो नरपती

ब्रह्मण सरवण व्यास भोजक, पूछिया जोगी जती (१)

पढिया पुस्तक बांचै, धोरी धरम बतायो

हाकिम रे मन जोर, दिल मां दाय न आयो

दाय न आयो दूज राखी, पाप कुल रो प्राणियों

राजकुल री रीति मेटै, करै भूंडी वाणियों

सादर सुणियो श्याम साचा, महर करि मोटा धाणी

विष्णु दोषी भस्म होसी, वाद कर बाढी वणी (२)

आ बारां री वार, चेलो चोकस लागो

वरण मिल्या बहु भांति, तमक्या करस्यां तागो

तागो तो करस्यां नहीं डरस्यां, धयान मन ऐसो धारो

मान तज्यां क्यूं मान रैसी, सिर सौंपो साको करो

कियो साको हुयो साखत, भड़क भड़ वो भाजसी

सार बहसी सीस पड़सी, लाणत तद लाजसी (३)

सिर सौंपै शुचियार, गोष्ठि करै गुरु भाई

खरतर खंडाधार, अणदे तेग समाई

तेग समाई हुवो तागो, नर नारी निश्चय खड़या

वणियाल विरतो चढी नांनी, पण राख्यो पातक झड़या

झड़ियर पातक हेत कर के दुःख मेट्यो दारिद हड़ियो

भलै वणीनै बुरो ताक्यो, दिन दसवैं चावो खड़ियो (४)

करै जै क्यों करतार, शूरां सार समाहो

अकरम हुवो अपार, बेगा वार न लावो

वार न लावो उठो बेगा, पाछा खिस्यां तो पण घटै

ऊदो सार समाही आयो, सिर सौंपां रूंखां सटै

सीस सौंपां आर नहीं कंपां, मरण हूं मत को डरो

होय होतब कौल गुरु कै, सिर सूंपो साको करो (५)

कर मन कौल करार, कान्है कंध नवायो

किसने रे मन कोड, सिर पर सिर दजै आयो

सिर दजै आयो स्वामी धियायो, साख राखी सिर दियो

दयराय सुरगे दाद पाई, जीव त्यागो जश लियो

लियो जश जिण जीव काजै, आथि उर सूं परहरि

ज्ञान गुरु कै धियान धरियो, सुरत स्वर्गे संचरी (६)

स्वर्गे सुख अपार, मन की तिरसनां भागी

कीयो वचन कबूल, दांमी देह अर त्यागी

देह त्यागी भ्रम भागो, शोभा देसां सांभलि

कृपा हूई कुलोभ छूटो, पणि राख्यो पूगी रलि

रलि पूगी राज करस्यां, काज करता सारिया

सिद्ध साधु विवाण चढिया, प्रभू पार उतारिया (७)

वै यूं दाखै बैन, राज रिण वट आयो

चीमां जनम सुधार, रतन काया धन पायो

पायो तो काया तजो माया, मन को मोह निवारिये

कारिवों तन काम केहै, प्रभु पंथ को सारिये

विरख पड़िय रिषि खड़िया, पंथ को पारख पड़ी

तागाला सों तेग बांधी, हाकिमनै हत्या चढी (८)

हत्या करै हैरान हुवो, कुबध कुमति कमाई

चेलै रै मन और, चौकस चाल चलाई

चाल चलाई हुवो तागो, आसी क्यो ओसले

बड़ो अवसर खड़यो मांझी, चावा पहुंतो चोखले

खड़ग धारा खेल मंडियो, और आपो मारियो

ज्ञान गुरु कै धियान धरियो, प्रभु काज संवारियो (९)

करतार करै जे सार, राजा करै कुफराणां

हरि जन पहुंतो पार, विधि सूं बात बखाणां

बात बखाणां सत्य जाणां, पण राखो पूरा धणी

पापियानै तुरन्त पहुंचो, तागाला तीखी अणी

अणी तीखी सुणी सिर पर, तके आखर क्यों ओदरे

पाछा खिसियां तो पण घटै, तंत लियै तागो करै (१०)

तागाला सूं ताण, काल्हा कदे न कीजिये

ऐह करां अहनांण, दुःख दे दाण लीजिये

दाण न लीजै मांण दीजै, वरण सतायो रानिये

सर्वस्व दामति साख पारख, रीत रकम न भानिये

आप तो मारै बेग सारै, दया पालै देखतां

तीनसौ तरेसठ ऊपर, पंथ पूरो पेखतां (११)

यो तागो संसार, जुग मां जोर बखाणां

सत मानै सुरताण, राजा राव बखाणां

राव बखाणों सत जाणों, जीव काया राखै जुओ

खरां खोटां रा भेद लाभै, खेजड़ली खलखट हुवो

मूल मरणो अमर नाहीं, मोमणो कीयो मतो

खड़या खांडै चढै चंवरी, करै अपछर आरतो (१२)