साखी-13
सहस्त्र नाम संभाल प्रभाते पूजा करो।
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सवैया
तपै गगन्दर सूर,चन्द्र पणि एको छाजै।
पणी नाऊं एक पवण, पणि एको बाजै।।
महिपणि एको एक, वासुदेव एकलवाई।
जंभ गुरु पणि एक, डरे डर जपो रे भाई।।
घणा रुप आगे किया, मान गरब देतां मल्यो।
जंभ गुरु सो इसो गुरु, जुग जुग ओही संभल्यो।।
सहस्त्र नाम संभाल प्रभाते पूजा करो।
आवागवण न होय, जीव अभय ले उधरो।
जीव अभय ले उधरो जांरी सतगुरु करे सहाय ।
स्वर्ग तणों सांसो नहीं जरा मरण मिट जाय।
पाठ कर पूजो हरि नै कटे जमो का जाल।
वेद व्यास कथिया जको सहस्त्र नाम संभाल।
प्रभाते पूजा करो॥ १॥
भागवत गीता गाय ग्रंथ नहीं गीता समो।
उरमें चेत अजाण लख चौरासी क्यों भुंवो।
लख चौरासी क्यों भुंवो ने गीता गुण कर याद।
अर्जुन पूछी हरि कही सो संवाद संभाल।
श्याम सदा साथे रहे, मन इच्छा फल पाय।
पाप सब प्रयल हुवै ने, भगवत गीता गाय।
ग्रन्थ नहीं गीता समो॥ २॥
भागवत पुरो पुराण सुणियां ही सांसो मिटे।
हुए अर्थ को लाभ किया कर्म सब ही मिटे।
किया कर्म सकल मिटे ने हुए अर्थ आधार।
पारायण पूरी सुंणी परीक्षित पंहुचे पारै।
हरि उद्धव संवाद को ने भागवत पूरो पुराण।
सुणियां ही सांसो मिटै॥ ३॥
शब्द सरीखो सार म्हारे सतगुरु आप सुणावीयों।
परहर पाप विकार जोत हुए जित जावीयो।
जोति हुवै जित जावीयै ने लीजे शब्द विचार।
शुद्ध मन होयकर होम कीजै हुए मंगलाचार।
पाप सब प्रलय करो नै मुक्ति द्यो मुरार।
श्री वायक संभाल प्राणी शब्दां सरीखो सार।
म्हारो सतगुरु आप सुणाविये॥ ४॥