साखी-12
सही विसवा वीस, साचो गुरु संभरथले
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सवैया
जिसो जम्भ सन्सारीं इसो कुंण सुगुण गुणवन्तों
मेधां देधा आहेंड़या हुवो साहिब सूं परचो।
आयानी गयानी किया ग्यान कथी दियो गिवारां।
नव-णी की सार न जाणत सहजो मिलियों सुचियारां।
भूलाभूतां पुजतां। हततां जीव अजाणी।
सेवा आया सांम्य की उदा पाणौ पिवे छाणी।।
सही विसवा वीस, साचो गुरु संभरथले
कान्हा कुंवर नन्दलाल, कृपा कर आयो भले
कृपा कर आयो भले नैं, थली चरावै ठाट
परच्चा ब्राह्मण बाणियां नै, भोजक चारण भाट
पवन छतीसों एकल, सतगुरु ज्ञान दियो जगदीश
चरण बन्द कर चलू ले लीनो, सही विसवा बिस
साचो गुरु संभराथले ( १ )
पूरो गुरु परमोध, सुपह सुमार्ग आणिया
शोधया जीव सुजीव, मोक्ष मुकत दिस ताणिया
मोक्ष मुकत दिस ताणिया नैं, किया पर उपकार
जाटां ऊपर झुक पड़ा नैं, हमकले अवतार
जंगी जंगी परसतिया नैं, राता कलह रु क्रोध
अड़क नर परचाविया, पूरे गुरु परमोध
सुपह सुमार्ग आणिया ( २ )
प्रकट्यो पूरण भाग, साचो गुरु संभरथले
दाख्यो आदू माघ, कृपा कर आयो भले
कृपा कर आयो भले नैं, घणी जे सरोवर धााय
भवसागर में डूबतांनै, काढ लियो गुरु सहाय
और गुरां नैं जंभ गुरु, अंतर हंस रू काग
परम गुरु संसार अयो, प्रकट्यो पूरण भाग
साचो गुरु संभरथले ( ३ )
गुरू दीन्ही मोक्ष बताय, भव भव तो भूला फिरे
रीझ करी सुरराय, मन इच्छा कारज सरै
मन इच्छा कारज सरै नैं, हरै जो पोते पाप
भाव सूं भगतां गुरु मिलिया, कलू पधार्या आप
पीपासर प्रगट्यो दई, देव जे आयो दाय
घर लोहट के अवतार नैं, दीन्ही मोक्ष बताय
भव भव तो भूला फिरै ( ४ )
गुरु किया निपट निहाल, पाप करंता पालिया
सत त्रेता की चाल, थरपण एकण थापिया
थरपण एकण थापिया नैं, आप दियो गुरु ज्ञान
विष्णु भणो विश्नोइयों थे, धरो जे स्वयंभू धियान
शील सिनान सुचाल चालो, मानों हक हलाल
जन 'हरजी' की वीणती, गुरु किया निपट निहाल
पाप करंता पालिया ( ५ )