साखी-19
साधो सिंवरो सिरजणहार, पारब्रह्म पहली नऊं
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सवैया
द्रव्य खैण में हेम उत्तम, चन्दन उत्तम सुवास
रसायण में घृत उत्तम खेती उत्तम कुपास
पोहमी में पाणी उत्तम मानुस उत्तम करणी
पक्षी जात में गुरूड उत्तम, क्षमा उत्तम धरणी
सर्ब जोत में सूरज उत्तम, चहूं दिश करै चांदनी
जुगै-जुगै भए विसन उत्तम उदा सर्बा सर्बें को धणी
साधो सिंवरो सिरजणहार, पारब्रह्म पहली नऊं
जिण सिरज्यो संसार, हरि चरणां लागो रहूं
हरि चरणां लागों रहूं नैं, सुणी बात विवेक
बरग बानें की बहो थे, श्याम राखी टेक
विष्णु दोषी भस्म होसी, संभलो करतार
सतगुरु वाचा पालियो थे, सिंवरो सिरजणहार
पारब्रह्म पहली नऊं (१)
भगतां सूं कर भाव, साधां ने सुपह बतावियो
चौ चक दोसे चाव, भाग परापति पावियो
भाग परापति पावियो, जे हुवा करणी सार
तन मन तो तजो माया, परिहरो परवार
पारब्रह्म सूं प्रीति जे, सतसंगत चित लाव
हेत कर हरि ध्याइये, भगतां सूं कर भाव
साधां ने सुपह बतावियो (२)
केइ केइ जीव कुजीव, परचाया परचे नहीं
बरजी बात अलेख, पंथ छोड़ चाल्या कहीं
पंथ छोड़ चाल्या कहीं नैं, लोपी गुरु की कार
भोगल जीव भरमें घणा, सह बहुती मार
काम क्रोध विकार घट मां, पाप पिण्ड लागा सही
कुजीव छेड़्यां कल्हे मांडे,केइ केइ जीव कुजीव
परचाया परचे नहीं (३)
तजियो गरब गुमान, मन मां मेर न आणियो
हिरदे धरियो ध्यान, विष्णुं विष्णुं बखाणियो
विष्णु बखाणों सतकर जाणों, काम क्रोध चुकाइयो
जीवने जो जुगत चाहो, श्याम से लिव लाइयो
घट पलट क्यों हुवे मूरख, पहले न चेत्यो प्राणियो
वाद विराम विकार तजियो, तजियो गरब गुमानियो
मन मां मेर न आणियो (४)
तेतीसां सूं मेल, मन इच्छा राखों घणी
स्वर्गे चाल सुचाल, पहुंचाओ पूरा धणी
पहुंचाओ पूरा धणी नैं, मनो मंगलाचार
पाप सब प्रलय करो, मुक्ति द्यो मुरार
पारगिरायें देवे वासो, मिले सुर वर कामणी
कह 'केशो' सुणो साधो, अरज सुणो पूरा धणी
मन इच्छा राखों घणी (५)