साखी-79
सिंवरो सतगुरु श्याम, आदि विष्णु शंभू सही
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सिंवरो सतगुरु श्याम, आदि विष्णु शंभू सही
संतां कारण श्रीदेव, संभरथल जागो दई
संभरथल श्याम जाग्यो, जोग जुगति पिछाणिया
परमोघ रूपी मिल्यो कलि मां, ब्रह्म ज्ञान बखाणिया
मोमणा मन आणंद हुवो, हेत कर मानी कही
परमगुरु संसारि साचो, आदि विष्णु शंभू सही ( १ )
भक्तां का धिन भाग, जिहिं हरि नाम उचारियो
मेलो मन की भ्रांति, सांसो सकल विसारियो
सकल सांसो विसारि सतगुरु, संसार सोग निवारै
कूड़ कपट कुबाण परहरि, छेदया कर्म अपारै
सुपह पंथ पिछाण वां रा, प्रीत करि निरहारी
महर करि गुरु पार देसी, भक्तां का धिन भाग री (२)
निंव निंव लागै पांय, परगास्यो पूरो धाणी
नर निकलंक नरेश, कर आयो कृपा घणी
घणी कृपा कर आइयो, सधर गुरु सुख देण
मया करि मन मांय मोटी, क्रोड़ि बारां लेण
च्यार चक आवाज हुई, इला ऊपरि यों सुणी
दुनी कूं दीदार दीयो, परगास्यो पूरो धणी (३)
भजन करो नर नारी, जनम सफल करि लीजिये
जीव जीवतो जाण, दान भाव भल सूं दीजिये
भाव भल सूं दीजिये दान, जगत गुरु जग धयाइये
दया दान विचार करणी, किसन कीरत गाइये
छाड माया जाल कलि का, कुमति कपट न कीजिये
विष्णु भज निश दिने प्राणी, जन्म सफल कर लीजिये (४)
पूरो सतगुरु आश, आवागवण चुकाइये
रसना राख मुरार, साधां संग निभाइये
साधां संग निभाईजे, बैकुंठ वासो सोय
कंथ कामण करै केला, सुख घणा सुरलोय
कोटि जोति उजास निहचल, सभ्य सहज सुहाय
दास 'ऊदो' कह करता, आवागवण चुकाय (५)