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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 109 / 120

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जो कह्या सुन सिद्धि लही, पाई वस्त अलेख।

शून्य ध्यान हृदय धरै, साधु कहे अलेख।

शब्द 109

ओ३म् देखत भूली को मनमानै, सेवै बिलोवै बाझ सनाने देखत भूली को मन चैवै, भीतर कोरा बाहर भैवै।

देखत भूली को मन मांनै, हरि पर हर मिलियो शैताने देखत भूली को मन चेवै, आक बखाणै थंदे मेवै।

भूला लो भल भूला लो, भूला भूल न भूलूं। जिहिं ठुंठड़िये पान न होता, ते क्यूं चाहत फूलूं।