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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 22 / 120

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वरसंग आय अरज करी, सतगुरु सुणियें बात।

तब ईश्वर कृपा करी, पीढ़ी उधरे सात।

शब्द 22

ओ३म् लो लो रे राजिंदर रायों, बाजै बाव सुवायो। आभै अमी झुरायो, कालर करसण कियो, नैपै कछू न कीयो।

अइया उत्तम खेती, को को इमृत रायो, को को दाख दिखायो। को को ईख उपायो, को को नींब निंबोली, को को ढ़ाक ढ़कोली। को को तूषण तूंबण बेली, को को आक अकायो, को को कछू कमायो।

ताका मूल कुमूलूं, डाल कुडालूं, ताका पात कुपातूं। ताका फल बीज कूबीजूं, तो नीरे दोष किसायो।

क्यूं क्यूं भऐ भाग ऊणां, क्यूं क्यूं कर्म बिहूणां, को को चिड़ी चमेड़ी। को को उल्लू आयो, ताकै ज्ञान न ज्योति, मोक्ष न मुक्ति। यांके कर्म इसायो, तो नीरे दोष किसायों।