मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 23 / 120

छपय

विष्णु भक्त गुंणावती, रहे जूं तेली जात।

विश्नोई धर्म आचरै, जम्भेश्वर किया पात।

शब्द 23

ओ३म् साल्हिया हुवा मरण भय भागा, गाफिल मरणै घणा डरै।

सतगुरु मिलियो सतपन्थ बतायो, भ्रान्त चुकाई, मरणे बहु उपकार करे।

रतन काया सोभंति लाभै, पार गिराये जीव तिरै, पार गिराये सनेही करणी।

जंपो विष्णु न दोय दिल करणी, जंपो विष्णु न निंदा करणी।

मांडो कांध विष्णु के सरणै, अतरा बोल करोजे साचा तो पार गिराय गुरु की वाचा।

रवणां ठवणां चवरां भवणां, ताहि परेरै रतन काया छै, लाभै किसे विचारे।

जे नविये नवणी, खविये खवणी, जरिये जरणी। करिये करणी, तो सीख हुवां घर जाइये।

रतन काया सांचे की ढ़ोली, गुरु प्रसादे, केवल ज्ञाने धर्म आचारे शीले संजमें, सतगुरु तुठे पाइये।