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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 37 / 120

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दूजो जोगी बोलियो, सुणिये सतगुरु बात।

एक ब्रह्य अद्वैत अज, सो यह कैसी गाथ।

शब्द 37

ओ३म् लोहा लंग लुहारूं, ठाठा घड़ै ठठारूं, उत्तम कर्म कुम्हारूं।

जइयां गुरु न चीन्हों, तइयां सींच्या न मूलूं, कोई कोई बोलत थूलूं।