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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 38 / 120

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गुंसाई एक आय के, बोला ऐसी बात।

ठुमरा पहरा गले में, भेख हमारा साच।

शब्द 38

ओ३म् रे रे पिण्ड स पिण्डूं, निरघन जीव क्यूं खंडूं, ताछै खंड बिहंडूं।

घड़िये से घमण्डूं, अइयां पन्थ कु पन्थूं, जइयां गुरु न चीन्हों। तइयां सींच्या न मूलूं, कोई कोई बोलत थूलूं।