शब्द 41
ओ३म् सुण राजेन्द्र, सुण जोगेन्द्र, सुण शेषिन्द्र, सुण सोफिन्द्र। सुण काफिन्द्र, सुण चाचिन्द्र, सिद्धक साध कहाणी।
झूठी काया उपजत विणसत, जां जां नुगरे थिती न जांणी।
राजा एक कनौज को, पाँच सिद्ध लिया साथ।
पांचां ने ई पिछाण ल्यै, तो ल्यां सतगुरु का हाथ।