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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 42 / 120

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भसम लगाई हमने, सोधा तत्व विचार।

नगर में पैसे नहीं चालै यह आचार।

शब्द 42

ओ३म् आयसां काहे काजै खेह भकरूड़ो, सेवो भूत मसाणी। घड़ै ऊंधै बरसत बहु मेहा, तिहिमां कृष्ण चरित बिन पड़यो न पड़सी पाणी।

योगी जंगम नाथ दिगंबर, सन्यासी ब्राह्मण ब्रह्मचारी मनहट पढ़िया पण्डित, काजी मुल्ला खेलै आपदवारी।

निश्चै कायों वायों होयसी, जै गुरु विना खेल पसारी।