शब्द 5
ओ३म् अइयालो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं।
नव अवतार नमो नारायण, तेपण रूप हमारा थीयूं।
जपी तपी तकपीर ऋषेश्वर, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।
खेचर भूचर खेत्रपाला परगट गुप्ता, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।
वासग शेष गुणिंदा फुणिंदा, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।
चोषट जोगनी बावन भैरूं, कांय जपीजै तेपण जाया जीऊं।
जपां तो एक निरालंभ शिम्भू, जिहिं के माई न पीऊं।
न तन रक्तूं न तन धातूं, न तन ताव न सीऊं।
सर्व सिरजत मरत विवरजत, तास न मूल ज लेणा कीयों।
अइयालो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं।