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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 6 / 120

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उधरण कान्हावत यों कहे, दोय कहै छै देव।

भिन्न भिन्न समझाइयों, हमें बतावों भेव।

शब्द 6

ओ३म् भवन भवन म्हें एका जोती, चुन चुन लिया रतना मोती।

म्हे खोजी थापण होजी नाही, खोज लहां धुर खोजूं।

अल्लाह अलेख अडाल अजोनी स्वयंभूं, जिहिं का किसा विनाणी।

म्हे सरै न बैठा सीख न पूछी, निरत सुरत सब जाणी।

उतपति हिन्दू जरणा जोगी, किरिया ब्राह्मण, दिल दरवेसां उनमुन मुल्ला, अकल मिसलमानी।