शब्द 7
ओ३म् हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यो, कांय दहदिश दिल पसरायो।
सोम अमावस आदितवारी, कांय काटी बन रायों।
गहण गहंते बहण बहंतै, निर्जल ग्यारस मूल बहंतै। कांयरे मुरखा तैं पालंग सेज निहाल बिछाई।
जा दिन तेरे होम जाप न तप न किरिया, जान कै भागी कपिला गाई।
कूड़ तणों जे करतब कियो, ना तै लाव न सायों।
भूला प्राणी आल बखाणी, न जंप्यो सुर रायो।
छंदै का तो बहुता भावै, खरतर को पतियायो।
हिव की बेला हिव न जाग्यो, शंक रह्यो कदरायो।
ठाढ़ी बेला ठार न जाग्यो, ताती बेला तायो।
बिम्बै बैला विष्णु न जंप्यो, ताछै का चीन्हौं कछु कमायो।
अति आलस भोलावै भूला, न चीन्हों सुररायो।
पार ब्रह्म की सुध न जांणी, तो नागे जोग न पायो।
परशुराम के अर्थ न मूवा, ताकी निश्चै सरी न कायो।