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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 8 / 120

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पुरोहित नै कहै देवजी, कोई पाहुणौं आवन्त।

चोरी करके निकले, लारै वार चढ़ंत।

शब्द 8

ओ३म् सुण रे काजी सुण रे मुल्ला, सुण रे बकर कसाई।

किणरी थरपी छाली रोसो, किणरी गाडर गाई।

सूल चुभीजै करक दुहैली, तो है है जायों जीव न घाई।

थे तुरकी छुरकी भिस्ती दावों, खायबा खाज अखाजूं।

चर फिर आवै सहज दुहावै, तिसका खीर हलाली।

जिसके गले करद क्यूं सारो, थे पढ़ सुण रहिया खाली।