शब्द 56
ओ३म् कुपात्र कूं दान जु दीयो, जाणै रैण अंधेरी चोर जु लीयो। चोर जु लेकर भाखर चढ़ियो, कह जिवड़ा तै कैने दीयो।
दान सुपाते बीज सुखेते, अमृत फूल फलीजै। काया कसोटी मन जो गूंटो, जरणा ढ़ाकण दीजै।
थोड़े मांहि थोड़ेरो दीजै, होते नाह न कीजै। जोय जोय नाम विष्णु को बीजै, अनन्त गुणां लिख लीजै।