शब्द 70
ओ३म् हक हलालूं हक साच कृष्णों, सुकृत अहल्यो न जाई।
भल बाहिलो भल बीजीलो, पवणा बाड़ बलाई। जीव के काजै खड़ो जे खेती, तामै ले रखवालो रे भाई।
दैतानी शैतानी फिरैला, तेरी मत मोरा चर जाई। उनमन मनवां जीव जतन कर, मन राखिलों ठाई।
जीव के काजै खड़ो ज खेती, वाय दवाय न जाई। न तहां हिरणी न तहां हिरणा, न चीन्हों हरि आई।
न तहां मोरा न तहां मोरी, न ऊंदर चर जाई।
कोई गुरु कर ज्ञानी तोड़त मोहा, तेरो मन रखवालो रे भाई। जो आराध्यो राव युधिष्ठिर, सो आराधों रे भाई।