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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 87 / 120

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लूणकरण बीकानेरीयो, ढ़ोसी ने हुवो तैयार।

खट् दर्शन में बूझियो, जीत कही तिण बार।

शब्द 87

ओ३म् जिहिं का उमग्या समाघूं, तिहिं पन्थ के बिरला लागूं।

बीजा चाकर बीरूं, रिण शंख धीरूं, कबही झूझत रायूं। पासै भाजत भायों।। तातैं नुगरा झूझ न कीयों।।