शब्द 99
ओ३म् साच सही म्हे कूड़ न कहिबा, नेड़ा था पण दूर न रहीबा। सदा संतोषी सत उपकरणां, म्हे तजिया मान अभिमानूं।
बसकर पवना बस कर पाणी, बस कर हाट पटण दरवाजो। दशे दवारे ताला जड़ीया, जो ऐसा उस ताजों।
दशे दवारे ताला कूंची, भीतर पोल बणाई। जो आराध्यों राव युधिष्ठिर, सो आराधो रे भाई।
जिहिं गुरु कै झुरैन झुरबा, खिरै न खिरणा, बंक तृबंकै। नाल पै नालै, नैणे नीर न झुरबा, बिन पुल बंध्या बांणों।
तज्या अलिंगण तोड़ी माया, तन लोचन गुण बाणों। हालीलो भल पालीलो सिध पालीलो, खेड़त सूना राणों।